सोनो : छह साल पहले सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव लाभ की कोई सुविधा नहीं रहने से ग्रामीण क्षेत्र की निर्धन महिलाएं बेबशी में जीती थी। आज माहौल बदल गया है। आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता से सुरक्षित प्रसव का रिकार्ड कायम हुआ है। जच्चा-बच्चा की मृत्युदर पर लगभग नियंत्रण पा लेने की स्थिति बनती जा रही है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों के प्रति आमलोगों का रुझान बढ़ा है। यदि हम पिछले छह वर्षो का डाटा देखें तो प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सोनो में संस्थागत प्रसव लाभ में बेतहाशा इजाफा दर्ज किया गया है।
वर्ष संस्थागत प्रसव
2006-07 81
2007-08 945
2008-09 1241
2009-10 1203
2010-11 1751
2011-12 (16 फरवरी 2012) 1546
वर्ष के चार महीनों में ज्यादा प्रसव लाभ
आंकडे़ बताते हैं कि जुलाई, सितम्बर, दिसम्बर तथा जनवरी माह में संस्थागत प्रसव लाभ के लिए अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या वर्ष के अन्य महीनों की तुलना में ज्यादा होती है। ऐसे देखा जाए तो लगभग हर महीनों में यहां 125-150 महिलाएं प्रसव लाभ प्राप्त करती है।
संसाधनों की उपलब्धता नो टेंशन का कारण
16 फरवरी को प्रसव के लिए आई सुमिया देवी व मोहनी देवी बताती है कि आशा दीदी की जिद करने पर वे अस्पताल पहुंची। प्रसव पूर्व उन्हें दवाईयां दी गई तथा एम्बुलेंस से उन्हें यहां लाया गया। सुमिया का यह पहला प्रसव है सो वह कुछ डरी-डरी सी दिख रही थी। लेकिन उन्हें डाक्टर साहब पर पूरा भरोसा है कि उसका प्रसव पूरी तरह सुरक्षित होगा।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने कहा
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सोनो के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. खुश्तर आजमी कहते हैं कि संस्थागत प्रसव लाभ के लिए अस्पताल आई महिलाओं को यहां पूरी तरह चिकित्सीय सलाह पर रखा जाता है तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का एक विशेष दल चौबीस घंटे निगरानी करता है। प्रसव में आने वाली परेशानी को प्राथमिकता के आधार पर निबटाया जाता है।
वर्ष संस्थागत प्रसव
2006-07 81
2007-08 945
2008-09 1241
2009-10 1203
2010-11 1751
2011-12 (16 फरवरी 2012) 1546
वर्ष के चार महीनों में ज्यादा प्रसव लाभ
आंकडे़ बताते हैं कि जुलाई, सितम्बर, दिसम्बर तथा जनवरी माह में संस्थागत प्रसव लाभ के लिए अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या वर्ष के अन्य महीनों की तुलना में ज्यादा होती है। ऐसे देखा जाए तो लगभग हर महीनों में यहां 125-150 महिलाएं प्रसव लाभ प्राप्त करती है।
संसाधनों की उपलब्धता नो टेंशन का कारण
16 फरवरी को प्रसव के लिए आई सुमिया देवी व मोहनी देवी बताती है कि आशा दीदी की जिद करने पर वे अस्पताल पहुंची। प्रसव पूर्व उन्हें दवाईयां दी गई तथा एम्बुलेंस से उन्हें यहां लाया गया। सुमिया का यह पहला प्रसव है सो वह कुछ डरी-डरी सी दिख रही थी। लेकिन उन्हें डाक्टर साहब पर पूरा भरोसा है कि उसका प्रसव पूरी तरह सुरक्षित होगा।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने कहा
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सोनो के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. खुश्तर आजमी कहते हैं कि संस्थागत प्रसव लाभ के लिए अस्पताल आई महिलाओं को यहां पूरी तरह चिकित्सीय सलाह पर रखा जाता है तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का एक विशेष दल चौबीस घंटे निगरानी करता है। प्रसव में आने वाली परेशानी को प्राथमिकता के आधार पर निबटाया जाता है।
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