झाझा, निज प्रतिनिधि : पीएचईडी विभाग की लापरवाही कहे या नगर पंचायत की उदासीनता के कारण विगत 28 वर्षो से झाझावासियों को सप्लाई वाटर नसीब नहीं हो पाया है। झाझा नगर क्षेत्र में जलापूर्ति हेतु जलमीनार सहित पाइप लाइनों तथा प्वाईटों के निर्माण के लिए झाझा अधिसूचित क्षेत्र द्वारा राच्य सरकार से ब्याज पर पैसा लेकर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को लाखों रुपए दिए गए। झाझा नगर पंचायत द्वारा सूद में लाखों रुपए का भुगतान सहित पुरानी बाजार स्थित जलापूर्ति हेतु स्थापित पंप हाउस, ट्रांसफार्मर का बाढ़ से हुए क्षति के मरम्मत में भी लाखों रुपए व्यय किए गए। राशि करोड़ों में चली गई परंतु झाझा नगरवासियों के घरों में जलापूर्ति संभव नहीं हो पाई।
वर्ष 2008 में पीएचईडी की खुली थी पोल
वर्ष 2008 में झाझा नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों द्वारा तत्कालीन जिलाधिकारी को पत्र के माध्यम से मामले से अवगत कराया गया था। साथ ही जिला स्तरीय बैठक में नगर पंचायत अंतर्गत जलाशय का मामला उठाया गया था। इस मामले को पीएचईडी के जिला अधीक्षक अभियंता एवं तत्कालीक अनुमंडलाधिकारी के बीच काफी विवाद भी गहराया जिसके तहत अनुमंडलाधिकारी द्वारा नगर अंतर्गत स्थलीय निरीक्षण किया गया था जिसमें जलापूर्ति के 32 प्वाइंटों में से सिर्फ छह ही चालू अवस्था में पाया गया था।
कब रखी गई नींव
वर्ष 1965 में जलापूर्ति जलमीनार का विधिवत उद्घाटन तत्कालीन पीएचईडी मंत्री रमा देवी एवं तत्कालीन विधायक डा. रविन्द्र यादव ने किया था।
क्या है निदान
अगर जलमीनार को झाझा नगर पंचायत को सुपुर्द कर दिया जाए ताकि उपभोक्ता इसका लाभ ले सकते हैं क्योंकि कनेक्शन की प्रक्रिया सरल हो जाएगी और लोग इसका भरपुर लाभ उठाएंगे।
क्या कहते हैं पदाधिकारी
पीएचईडी के कनीय अभियंता मो. रसूल रहमान ने कहा कि इस जलमीनार में बहुत सारी त्रुटियां है तीस प्वांइट में से 24 प्वाइंट संचालित है जो विगत माह से बंद पड़ा हुआ है। जलमीनार के मेंटेनेंस के लिए विभाग द्वारा कोई राशि उपलब्ध नहीं है।
वर्ष 2008 में पीएचईडी की खुली थी पोल
वर्ष 2008 में झाझा नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों द्वारा तत्कालीन जिलाधिकारी को पत्र के माध्यम से मामले से अवगत कराया गया था। साथ ही जिला स्तरीय बैठक में नगर पंचायत अंतर्गत जलाशय का मामला उठाया गया था। इस मामले को पीएचईडी के जिला अधीक्षक अभियंता एवं तत्कालीक अनुमंडलाधिकारी के बीच काफी विवाद भी गहराया जिसके तहत अनुमंडलाधिकारी द्वारा नगर अंतर्गत स्थलीय निरीक्षण किया गया था जिसमें जलापूर्ति के 32 प्वाइंटों में से सिर्फ छह ही चालू अवस्था में पाया गया था।
कब रखी गई नींव
वर्ष 1965 में जलापूर्ति जलमीनार का विधिवत उद्घाटन तत्कालीन पीएचईडी मंत्री रमा देवी एवं तत्कालीन विधायक डा. रविन्द्र यादव ने किया था।
क्या है निदान
अगर जलमीनार को झाझा नगर पंचायत को सुपुर्द कर दिया जाए ताकि उपभोक्ता इसका लाभ ले सकते हैं क्योंकि कनेक्शन की प्रक्रिया सरल हो जाएगी और लोग इसका भरपुर लाभ उठाएंगे।
क्या कहते हैं पदाधिकारी
पीएचईडी के कनीय अभियंता मो. रसूल रहमान ने कहा कि इस जलमीनार में बहुत सारी त्रुटियां है तीस प्वांइट में से 24 प्वाइंट संचालित है जो विगत माह से बंद पड़ा हुआ है। जलमीनार के मेंटेनेंस के लिए विभाग द्वारा कोई राशि उपलब्ध नहीं है।