Friday, 2 March 2012

सड़कों पर फल-फूल रहा अवैध स्टोन का व्यवसाय

जमुई, जागरण प्रतिनिधि : जिस होकर सड़कें गुजरती है। जाहिर है विकास की एक रुप-रेखा खींच सी जाती है जिसका तक्षण प्रभाव दिखने लगता है। ताजा नजारा अवैध स्टोन व्यवसाय का है जो सड़कों पर फल-फूल रहा है। भले ही यह वाहनों के लिए दुर्घटना का कारण भी बने पर बड़े पैमाने पर घरों व सरकारी भवनों के निर्माण की आड़ में यह व्यवसाय चल रहा है। बिहार खनिज समनुदान नियमावली 1972 के नियम 49 (1) के तहत पट्टा क्षेत्र से बाहर लघु खनिज का भंडार कर व्यवसाय करने वाले व्यवसायियों को लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। जमुई में इस नियमावली का खुलेआम उल्लघंन हो रहा है। अब जरा जमुई से नवादा की ओर रूख करें तो जमुई, महादेव सिमरिया के बाद सिकन्दरा-अलीगंज तक एसएच 18 पर तकरीबन एक दर्जन जगहों पर टील्हे के रुप में स्टोन-चिप्स रखे मिलेंगे। दरअसल रसूखदार बड़े व्यवसायियों द्वारा दुमका, पाकुड़, शेखपुरा से स्टोन-चिप्स लाकर बेचा जाता है। भंडारन के लिए व्यवसायी चौड़ी चिकनी सड़क व उसके फ्लैंक का उपयोग कर रहे हैं। नतीजतन सात मीटर चौड़ी सड़क सिकुड़कर पुराने रुप में आ गई है। ऐसे में राहगीरों को परेशानी तो हो ही रही। वहीं वाहन परिचालन में जाम की स्थिति बनी रहती है। कुछ ऐसा ही नजारा जमुई शहर से लखीसराय की ओर जाने वाली मुख्य सड़क का है। जमुई-मलयपुर मुख्य मार्ग पर भी अवैध स्टोन-चिप्स का व्यवसाय किया जा रहा है। अब तक स्थानीय प्रशासन अथवा संबंधित विभाग ने एक बार भी व्यवसायियों को सड़कों पर भंडारन करने से नहीं रोका है। आमजनों के लिए विरोध करना तो मुसीबत के समान है।
खनन पदाधिकारी ने कहा
जिले के खनन पदाधिकारी एचएस दास ने कहा कि सड़कों के किनारे बिना लाइसेंस स्टोन-चिप्स का भंडारन कर व्यवसाय करना अवैध है। उन्होंने कहा कि अब तक जिनहरा के दो व्यवसायियों ने ही भंडारन का लाइसेंस लिया है।

No comments:

Post a Comment