दुर्गावती जलाशय योजना की समकालीन बरनार जलाशय योजना पिछले चार दशकों से दुर्गति के दलदल में फंसी है। विशेषकर सांसदों के नकारापन की वजह से उक्त महत्वाकांक्षी योजना राष्ट्रीय फलक पर दस्तक देने में सफल नहीं हो सकी थी। देर से ही सही क्षेत्रीय सांसद भूदेव चौधरी ने 18 मई 2012 को संसद में बरनार जलाशय योजना व उसकी उपयोगिता पर सदन का ध्यान आकृष्ट कराया।
संसद में सांसद ने कहा : सांसद भूदेव चौधरी ने सदन में इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जमुई लोकसभा क्षेत्र बहुत पिछड़ा और सूखाग्रस्त क्षेत्र है। यह माओवाद व नक्सलवाद का केन्द्र भी है। आज से 35 साल पहले बरनार नदी पर डैम बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। कार्य भी शुरू हुआ। 10 से 15 करोड़ रुपए का व्यय हुआ। यहां पंद्रह हजार एकड़ भूमि को सिंचित होना था। सांसद ने 1990 से बंद बरनार डैम के तकनीकी कारणों को उल्लेख करते हुए सरकार से मांग की कि जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारियों की एक सर्वे टीम बनाएं व इसका सर्वे कराएं। दो माह पूर्व केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के सोनो आगमन पर किसानों ने भी उनसे बरनार डैम निर्माण की मांग की थी। सांसद ने यह जानकारी भी सदन को दी। यहां के आंदोलनरत किसानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बरनार मुद्दे पर पिछले दो दर्शकों से किसानों का आंदोलन जारी है। अत: सर्वे कराकर बरनार बांध बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
विधानसभा में भी बरनार पर हुई चर्चा
स्थानीय विधायक सुमित कुमार सिंह ने विधानसभा में बरनार जलाशय योजना का मुद्दा तीन दफे उठाया। उन्होंने सदन में यहां तक कह दिया कि यदि बरनार बांध का काम फिर से शुरु नहीं कराया जाता है तो वे विधानसभा के समक्ष अनशन पर बैठेंगे। इस बाबत संबंधित मंत्री ने आश्वस्त किया कि केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है निकट भविष्य में उन्होंने पाजेटिव रिजल्ट आ जाने की बात कही। विधायक ने केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश से इस मुद्दे पर गहन बातचीत भी की।
दो दशकों से जारी है किसानों का आन्दोलन
1991 से लगातार बरनार का मुद्दा सुर्खियों में रहा है। किसान नेता हलधर कपिलदेव इस क्षेत्र के एकमात्र ऐसे शख्स हैं जिन्होंने बरनार में सात दिवसीय अखंड कीर्तन करवाया। हल के साथ किसानों का दल इन्हीं की अगुआई में राज्यपाल से मिला। अपने माथे पर धान के सूखे बिचड़ों की पगड़ी के साथ उन्होंने तत्कालीन विदेश राच्य मंत्री दिग्विजय सिंह को एक ज्ञापन सौंपा आदि । हालांकि इस क्षेत्र के प्रबुद्धजनों व सक्रिय किसानों का सतत सहयोग उन्हें मिलता रहा है। बरनार बांध संघर्ष समिति के सहसंयोजक मदन यादव तो अपनी साइकिल पर बरनार बांध पूरा करो का बोर्ड लगाकर चलते हैं।
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