Monday, 21 May 2012

महंगाई : गृहणियां क्रोधित, गृहस्वामी परेशान


विगत तीन वर्षो में बढ़ी महंगाई ने हर आम व खास की कमर तोड़ दी। रसोई के अंदर, रसोई के बाहर सभी जगहों पर महंगाई ने भयानक रुप से पैर पसारा है। आमजन रोजमर्रा की जरुरतों को पूरा करने के लिए रातदिन मेहनत करते हैं लेकिन बढ़ती महंगाई उनके मंसूबे पर पानी फेर देती है। संप्रग सरकार के तीन वर्षो के कार्यकाल में लाख दावों के बावजूद आर्थिक मोर्चे पर सरकार फ्लाप रही है।
रसोई का हाल बेहाल
पिछले तीन सालों में खाद्य सामग्रियों की कीमत लगभग दुगुनी हो गई है जिससे गृहणियां क्रोधित हैं तो गृहस्वामी परेशान। सबसे आश्चर्य जिस नमक को लेकर महात्मा गांधी ने नमक आंदोलन चलाया उस नमक की भी कीमत तीन सालों में छह रुपया प्रतिकिलो से दस रुपया प्रतिकिलो हो गई।
आइए एक नजर डालें खुले बाजार में सामान के तीन साल पूर्व के मूल्य और अब के
सामग्री तीन साल पूर्व वर्तमान मूल्य
अरहर दाल 45 70
चावल मंसूरी 13 17
चावल सीता 15 22
सरसों तेल 60 100
रिफाइन 55 90
चीनी 16 34
चना 25 48
रसोई के बाहर मंहगाई का कहर
महंगाई ने रसोई के बाहर भी कहर बरपाना जारी रखा है। नारी प्रसाधन वस्तुओं के साथ-साथ घर को सजाना भी महंगा हो गया है। सभी वस्तुओं के मूल्यों में लगभग दोगुना का अंतर आ गया है। तीन साल पहले तीन हजार रुपए में मिलने वाले सामान्य दर्जे की आलमीरा की कीमत आज छह हजार से अधिक हो गई। वहीं दस हजार वाली गोदरेज आलमीरा 18 से 20 हजार में मिलती है। कुछ ऐसा ही हाल महिलाओं के लिए अति आवश्यक वस्तुओं का भी है। तीन साल पूर्व 25 रुपए मीटर मिलने वाला पेटिकोट का कपड़ा 45 रुपए मीटरमिलता है। इसी प्रकार 75 रुपये मीटर मिलने वाली ब्लाउज के कपड़े 110 रुपए मीटर तो सिल्क का कपड़ा 250 रुपये मीटर से 450 रुपये मीटर हो गया।
घर के बाहर भी बढ़ी महंगाई
घर के बाहर की स्थिति भी कुछ इतर नहीं। जहां पेट्रोल की कीमत आसमान छू गई वहीं तीन साल पूर्व मिलने वाली बजाज डिस्कवर बाइक की कीमत 31 हजार से 38 हजार हो गई। इसके साथ ही यात्रा किराया में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
लोगों की प्रतिक्रिया
रुबी सिंह : महंगाई ने रुला दिया है। समझ में नहीं आता है घर का खर्चा कैसे चलेगा। सरकार ने हमलोगों का मूंह बंद कर दिया है।
मंजू गुप्ता : सरकार एक ओर गरीबों के लिए कई योजनाएं चला रही है तो दूसरी ओर टैक्सों में वृद्धि कर तथा महंगाई बढ़ा लोगों को गरीब बना भी रही है।
गुड्डन प्रसाद: महंगाई ऐसी है कि घर का खर्चा नहीं चल पा रहा है। 30 से 40 रुपए की आमदनी में छह जनों के परिवार का पालन पोषण करना पड़ता है।
कपड़ा व्यवसायी मुकेश कुमार कहते हैं कि तीन सालों में कपड़ों की कीमत में 60 से 70 फीसद बढ़ोतरी हुई है। ग्राहक अब पाकेट टटोलकर कपड़े खरीदते हैं।

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