जिले के सबसे अधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र चकाई में मस्तिष्क ज्वर का दायरा इस बार बढ़ सकता है। बीते वर्ष प्रखंड अंतर्गत गजही, बरमोरिया, ठाढ़ी, बामदह तथा चौफला पंचायत में इंसेफेलाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) बीमारी से छह लोगों की मौत हुई थी जिससे स्वास्थ्य विभाग अचानक सकते में आ गया था। हालांकि इन मामलों के बाद विभाग व असेफा द्वारा उक्त बीमारी से बचाव के लिए कई तरह के प्रयास किए गए थे। इस बार भी बरसात के पूर्व मस्तिष्क ज्वर की बीमारी से निपटने के लिए विभाग ने कमर कस ली है।
क्या है मस्तिष्क ज्वर के लक्षण
इंसेफेलाइटिस की शुरुआत आम बुखार की तरह होती है जिसमें लगातार तेज बुखार, सिर दर्द, ठंड देकर बुखार आना शामिल है। यूं कहें कि मलेरिया के रोग के लक्षणों की तरह मस्तिष्क ज्वर के लक्षण होते हैं ।
धान के खेतों से फैलता है मस्तिष्क ज्वर
मूलत: बरसात के दिनों में धान के खेतों में इंसेफेलाइटिस के मच्छर पाए जाते हैं जिससे यह बीमारी फैलती है। ठहरे हुए पानी में यह मच्छर बड़ी संख्या में उत्पन्न होता है और अपने आसपास के इलाके में इंसेफेलाइटिस रोग फैलाते हैं। यूं तो बीते वर्ष चकाई में छह मामले सामने आए थे। जिसमें सभी बीमार व्यक्तियों की मौत हो गई थी।
जिले में नहीं है जांच की व्यवस्था
इंसेफेलाइटिस रोग की पहचान के लिए जिले में जांच की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा रोगियों के रक्त जांच के नमूने बाहर भेजे जाते हैं। जिसमें कई दिनों का वक्त लगता है। सीएस भी इस बात को स्वीकारते हैं कि मस्तिष्क ज्वर के मरीजों का बेहतर इलाज पटना में कराया जा सकता है। इसलिए इस तरह का मामला आने पर पटना रेफर कर दिया जाता है।
असेफा ने की थी पहल
मस्तिष्क ज्वर के कई मामले सामने आने के बाद चकाई असेफा और अन्य कई स्वयं सेवी संस्थानों ने जागरुकता अभियान चलाया था। साथ ही प्रभावित क्षेत्र में केमिकलयुक्त मच्छरदानी का वितरण भी किया था। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डीडीटी के छिड़काव भी कराए गए थे। ताकि यह बीमारी और ज्यादा न फैले।
स्वास्थ्य विभाग ने कस ली है कमर
मस्तिष्क ज्वर से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस बार पूरी तैयारी की गई है। जिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. चन्देश्वर चौधरी ने बताया कि बरसात के पूर्व जून माह में चकाई के चिन्हित पंचायतों में डीडीटी का छिड़काव कराया जाएगा ताकि इस बार इंसेफेलाइटिस के मच्छर पनप न सकें। उन्होंने बताया कि इसके अलावे जिले के विभिन्न प्रखंडों में डीडीटी के छिड़काव के साथ-साथ जागरुकता अभियान भी चलाया जाएगा। उन्होंने सभी जिलेवासियों को इस तरह की बीमारी से बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करने की बात कही है।
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