यूं तो बच्चों को आठवीं कक्षा तक मुफ्त एवं जरूरी शिक्षा का कानूनी अधिकार प्राप्त हुए दो साल बीत गए। इस दौरान जमुई जिले के 1526 गांवों में 1701 प्राथमिक व मध्य विद्यालयों का बड़ा सा आधारभूत ढांचा तैयार किया गया। वित्तीय वर्ष 2009-10 में सर्वाधिक नए स्कूल जमुई जिले में खोले गए। पर राइट टू एजुकेशन कसौटी पर खरा नहीं उतर सके। मिसाल के तौर पर प्रारंभिक स्तर पर एक शिक्षक पर 30 बच्चों को पढ़ाने का दायित्व आदर्श स्थिति मानी जाती है। यहा स्थिति उलट है। आठवीं कक्षा तक के नामांकित छात्र-छात्राओं की संख्या 3 लाख 90 है तो महज 6324 शिक्षक हैं। जिले में छात्र- शिक्षक का अनुपात 62 है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में 6000 शिक्षकों की कमी है। इधर स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की घोर कमी देखी जा रही है। मसलन शौचालय व पेयजल सुविधा से महरूम बच्चे परेशान हैं। इसकी एक बानगी यह है कि नक्सल प्रभावित सोनो प्रखंड के 60 फीसद स्कूलों में पेयजल की सुविधा नहीं है।
बच्चों को नहीं मिले किताब
सरकारी विद्यालयों में गर्मी की छुट्टी हो चुकी है। स्कूल खुलने के कुछ ही दिनों के बाद छमाही की परीक्षा होगी। परंतु बच्चों को अब तक स्कूल से किताबें नहीं मिली। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि जिले में 12927 छात्र-छात्राओं को किताबें नहीं मिली है। ऐसी स्थिति में राइट टू एजुकेशन की बात बेमानी सी लगती है। ऐसे ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा परोसने के कारण शिक्षा विभाग ने जमुई जिले को फीसड्डी के तमगा से नवाजा है।
विरोधी की भूमिका में बच्चे
यकीन मानिए प्राथमिक शिक्षा की अराजक स्थिति को किसी विरोधी राजनीतिक दल ने अपने एजेंडे में भले ही शामिल नहीं किया पर बच्चे व्यवस्था से नाराज होकर निरंतर सड़कों पर उतरते रहे हैं। वर्ष 2011 में पोशाक व साइकिल की राशि, मध्याह्न भोजन में अनियमितता, शिक्षकों की कमी तथा छात्रवृत्ति राशि को लेकर छात्र-छात्राओं ने कुल 37 बार सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। जो आज भी जारी है।
वर्ष 2012 में जिन स्कूली बच्चों ने किया प्रदर्शन
चकाई प्रखंड अंतर्गत उमवि गोला , प्राथमिक विद्यालय रामचन्द्रडीह, नवीन प्राथमिक विद्यालय लछुआडीह, उमवि हेठचकाई, प्राथमिक विद्यालय छछुडीह, लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय साकल निमुंडा, अलीगंज प्रखंड के मध्य विद्यालय इस्लामनगर, नवीन प्राथमिक विद्यालय मंदरामुसहरी, मध्य विद्यालय गोखुलचक, जमुई प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय काकन, बरहट प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय फुलवरिया आदि स्कूली बच्चे मध्याह्न भोजन, शिक्षकों की कमी को लेकर सड़कों पर उतरे हैं।
पदाधिकारी ने कहा
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी राजदेव राम बताते है कि शीघ्र ही बच्चों को किताबें उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि विद्यालय में पेयजल व शौचालय की व्यवस्था को लेकर पीएचइडी के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य किए जा रहे हैं।
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