लगातार जमुई में सड़क दुर्घटनाओं में यात्रियों की हो रही मौत के बावजूद परिवहन नियम की अनदेखी आम बात है। वाहन चालको के हौसले इतने बुलंद है कि उन्हें नियम कानून का कोई डर ही नहीं है। सभी बस पड़ाव से यात्रियों को वाहन में भेड़-बकरियों की तरह ठूंस कर बैठाया जाता है। इतना ही नहीं गति सीमा का पालन किए बगैर छोटी-छोटी यात्री वाहन हवा से बातें करती है। सबसे आश्चर्य तो यह है कि नई-नई सड़कों पर दौड़ लगाती आटो की स्पीड देखकर लोग उसका नाम विसी रख दिया है। कोई भी यात्री वाहन ऐसा नहीं है जिसमें क्षमता से डेढ़ या दो गुणा यात्री नहीं बिठाया जाता हो। न तो चालक को दुर्घटना का डर है और न ही यात्री को। जिस मार्ग पर वाहनों की अधिकता है वहां तो कुछ ठीक है पर जिस मार्ग पर वाहनों का परिचालन कम होता है वहां तो ऊपर-नीचे यात्री को ढूंसकर बिठाया जाता है। जमुई-सिकन्दरा, जमुई-खड़गपुर, जमुई-मांगोबंदर आदि मार्ग पर ऐसी स्थिति हमेशा देखी जा सकती हे। ऐसा नहीं कि वाहन के ऊपर बैठने वाले यात्रियों से किराया कम लिया जाता है। यात्रियों की मजबूरी होती है। स्टैंड ठेकेदार एवं वाहन चालक जब तक ऊपर -नीचे यात्री फुल नहीं करते वाहन आगे बढ़ते ही नहीं है।
क्या है नियम
किसी भी वाहन के रजिस्ट्रेशन के समय उस पर बैठने वालों की क्षमता निर्धारित रहती है। निर्धारित यात्रियों से अधिक यात्री बैठाने वालों पर ओवर लोडिंग एवं नेगलिजेंट एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
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